मेरा आठवाँ प्रकाशन / MY Seventh PUBLICATIONS

मेरा आठवाँ प्रकाशन  / MY Seventh PUBLICATIONS
मेरे प्रकाशन / MY PUBLICATIONS. दाईं तरफ के चित्रों पर क्लिक करके पुस्तक ऑर्डर कर सकते हैंं।
M.R.Iyengar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
M.R.Iyengar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

बिछना - बिछाना


बिछना - बिछाना.

जमाना बदल रहा है.
काफी बदल गया है.
लेकिन बिछने की आदत अभी कायम है.
पहले आँखें बिछाते थे,
नजरें बिछाते थे,
फिर कालीने बिछने लगीं ,
लोगों को फख्र महसूस होता था,
लोगों को हर्ष महसूस होता था,
जब किसी प्रतिभावान स्त्री- पुरुष के समक्ष,
साष्टांग प्रणाम करने,
बिछ जाने को,
कतार लगती थी,

अब भी लोगों को फख्र महसूस होता है,
अब भी लोगों को हर्ष महसूस होता है,
लेकिन अब नजारा और है,

कि अब हम न ही बिस्तर बिछाते हैं,
न ही हम कालीनें बिछाते हैं,
न ही नजरे इनायत बिछाई जाती है,
हम बिछाने में विश्वास नहीं करते ....

हम तो खुद ही बिछ जाते हैं.


एम.आर.अयंगर.
09425279174.

रविवार, 19 जून 2011

MRITYUDAND

मृत्युदंड

                     जहाँ पूजनीय है नारी,
                     वहीं देवता बसते हैं,
                     किंतु राम से देव..
                     दैव हा!!
                     अग्नि परीक्षा लेकर भी,
                     सीताजी को तजते हैं.

                     कहाँ दोष सीता का कहिए,
                     उसका हुआ हरण जो था?
                     रावण को भड़काने वाला,
                     भगिनी कटा कर्ण तो था.

                     यदि रावण अपने पक्ष में प्रस्तुत करता,
                     सीताजी के अग्नि परीक्षा की रिपोर्ट,
                     तो क्या मृत्यु दंड दे सकता था उसे...
                     यह सुप्रीम कोर्ट ???