वार
तुम नजरों ही से बोला करो,
तुम्हारे जुबाँ की फितरत,
कुछ और होती है,
नजरों से बयाँ करने की अदा,
जुबाँ में नहीं मिलती.
जुबाँ से किया हुआ वार,
अश्लीलता की बौछारें लिए आता है,
और नजरों की कटारी का मारा वार भी,
तुम्हारी अदाओं पर मर जाता है.