मेरा आठवाँ प्रकाशन / MY Seventh PUBLICATIONS

मेरा आठवाँ प्रकाशन  / MY Seventh PUBLICATIONS
मेरे प्रकाशन / MY PUBLICATIONS. दाईं तरफ के चित्रों पर क्लिक करके पुस्तक ऑर्डर कर सकते हैंं।

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

धारणाएं


धारणाएं

तुम मुझे अपना प्रिय मत बनाओ,
मानता हूँ, जानता हूँ,
तुम मेरी आदतों से, व्यवहार से,
प्रभावित हो रहे हो,
मेरी विचार धारा
तुम पर असर कर रही है,

शायद यह तुम्हारी सोच विचार से,
मेल खाती है।
फिर भी मेरी सुनो,
मेरा सहयोग तुम्हें कष्टतर होगा,
यह विचारधारा इस समाज में,
इस वातावरण में, इन लोगों में
सम्मति नहीं पाती।

लोग सच बोलने की आदत को,
अब नकारते हौं,
स्वेच्छा इन्हें नापसंद है।
हाँ जी - हाँ जी का स्वर,
सम्यक हो गया है,
लोग इसे सुनने के आदी हो गए हैं।

इस राह से बिछ्ड़े लोगों को आज,
इनके समाज में,
स्थान नहीं है,


यह बात और है कि इनके अलावा,
इस समाज की कोई और
अहमियत भी नहीं है,

मैं इस समाज की परवाह नहीं करता,
मेरी विचार धारा, मेरी धारणाएँ,
मुझे इस समाज से ज्यादा प्रिय हैं।
इनका बिछोह मुझे मंजूर नहीं है,
इसीलिए इस समाज को छोड़,
मैं अपनी धारणाओं के साथ बँधा हूँ...,
बँधा रहना चाहता हूँ,
क्योंकि इसी में मुझे खुशी होती है
संतोष होता है।
.....................................................

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your comment. I will soon read and respond. Kindly bear with me.