MY THIRD BOOK

MY THIRD BOOK
मेरी तीसरी प्रकाशित पुस्तक (मई में प्रकाशित होगी)

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

...मजहब से आगे....

हे राम कहूँ या हाय राम,
इंसां की कैसी नादानी,
समझा तुमको बहु आयामी,
तुम कहलाते अंतर्यामी.

देखो इंसां के हौसले, आज
वह आज दे रहा फैसले,आज
कहते रब की जगह कहाँ है,
कहे राम का धाम वहाँ है.

मानव आज अमानव कैसा,
निलय तेरी तय करने जैसा,
करता तय अनंत की सीमा,
सोचा खुद की कोई सीमा ?

रचना रचनाकार को बाँधे,
औ’ आकार अनंत का साधे,
जीवन बीत रहा जप जिसका,
राम कृष्ण सिया राधे राधे.

बेहद की सरहद बाँध रहा,
क्यों अपनी सरहद लांघ रहा,
जो अंतर्यामी है उसको,
इक चबूतरे बाँध रहा.

राम रहीम में कब थी लड़ाई,
गीता कुरान में किसकी बुराई,
हिंदू मुस्लिम जब भाई-भाई,
रहें संग क्यों करें लड़ाई.

मजहबों के रास्ते चाहे अलग
मंजिलें सबकी मगर हैं एक ही,
जब नहीं टकराव कोई आपसी,
संग रहकर दोनों क्यों हो ना खुशी,

अपने मजहब से बढ़के भी कुछ कीजिए,
दोनों का रस्में पूरी करे प्रण लीजिए


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03.10.10. राजकोट.
एम आर अयंगर.
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